अभी तक ये पता नहीं चला है कि जानवरों पर कोरोना वैक्सीन का असर क्या है। हालांकि वुहान से लेकर इंग्लैंड तक के लैब वैक्सीन बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे पहले ईबोला की वैक्सीन पांच साल के रिसर्च के बाद बनी थी। इस बार पूरी दुनिया आपात स्थिति से निपट रही है, इसलिए तैयारी उसी तरह से हो रही है। दो साल के क्लीनिकल ट्रायल को दो महीने के भीतर पूरा करने की योजना बनाई गई है।
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