पहली बार करीना को देखकर कांप गई थी: राधिका

'मर्द को दर्द नहीं होता' और 'पटाखा' जैसी फिल्में करने वाली ऐक्ट्रेस अब '' को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में वह खान और करीना कपूर खान के साथ दिखेंगी। राधिका से इस फिल्म और उनके करियर के बारे में हुई खास बातचीत: आप सिर्फ लीक से हटकर फिल्में ही कर रही हैं। क्या तय कर लिया था कि टिपिकल हिरोइन वाले रोल नहीं करूंगी, वह टीवी में काफी कर लिया?नहीं, मेरे पास ये लग्जरी नहीं थी कि मैं फिल्म चुन सकूं। मैंने सभी फिल्मों के लिए ऑडिशन दिए हैं। मैं वे फिल्में करना चाहती थी, लेकिन 'मर्द को दर्द नहीं होता' और 'पटाखा' जैसे प्रोजेक्ट मेरे पास खुद आए। उन्होंने मुझे चुना, वरना मैं तो क्लीशेड लड़की थी। मैं भी यही सोचती थी कि मुझे सुंदर लगना चाहिए, मेरे बाल उड़ने चाहिए, लेकिन वासन बाला और विशाल भारद्वाज सर ने मेरी पूरी सोच बदल दी, सारी हिचक तोड़ दी। अब मैं एक अलग नजरिए से ऐक्टिंग और फिल्मों को देखती हूं। वासन सर (मर्द को दर्द नहीं होता के निर्देशक) ने मेरे बाल उड़ाए, पर ऐक्शन करवाकर। उन्होंने मुझे यह अहसास दिलाया कि आपके लुक्स टेंपरेरी हैं, आपका काम परमानेंट है। इसलिए, अपने काम पर ध्यान दीजिए। उसके बाद मैंने जो भी फिल्में लीं, वह अलग नजरिए से सोचकर कीं। मैंने कभी नहीं सोचा कि मैं सुंदर लग रही हूं या नहीं। पूरा 'अंग्रेजी मीडियम' में मैंने चश्मा पहना हुआ है, चोटी बनाई हुई है। मैं वह करैक्टर हूं, मैं तारिका हूं, मैं हीरोइन नहीं हूं। टीवी से फिल्मों की ओर ट्रांजिशन करते वक्त क्या प्लान थे?वह एक पल था, जहां टेलिविजन में मैं एक सीन कर रही थी और डायरेक्टर से डिस्कस कर रही थी कि सर, मेरे केरैक्टर के साथ तो ये हुआ है, तो वह ऐसे क्यों रिऐक्ट करेगी? मैं थोड़ी गहराई में जानने की कोशिश कर रही थी, तो वे झल्लाकर बोले, राधिका, जब हम मूवी करेंगे न, तब एक सीन तीन दिन तक डिस्कस करेंगे। टीवी में टेलिकास्ट है भाई। यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई कि एक सीन तीन दिन तक डिस्कस कर सकते हैं। ये क्या लग्जरी है? तब हमारा टीवी शो कलर्स पर नंबर वन था, शो खत्म होने से पहले मुझे तीन और शो के ऑफर मिल चुके थे, लेकिन मैंने वह सब छोड़ा, क्योंकि मैं यह चीज अनुभव करना चाहती थी कि करैक्टर को तीन दिन तक डिस्कस करने ये लग्जरी क्या है? जो टेलिविजन में शायद मुझे नहीं मिलती। तब मैं काफी छोटी भी थी, मैं सिर्फ 20 साल की थी, टीवी में बहुत पैसे कमा चुकी होती, क्योंकि वहां एक शो हिट हो जाता है, तो आपको बहुत सारे प्रॉजेक्ट मिल जाते हैं। लेकिन मुझे अपने सपने पूरे करने थे, तो मैं निकल गई। 'अंग्रेजी मीडियम' में आप इरफान खान और करीना कपूर खान जैसे बड़े ऐक्टर्स के साथ काम कर रही हैं। कैसा अनुभव रहा?यार, मुझे ट्रेलर तक यह अहसास नहीं हुआ कि मैंने उनके साथ फिल्म कर ली। जब ट्रेलर में मैंने अपना नाम पढ़ा, इरफान सर और करीना के बाद, तो मेरे आंखों से आंसू आ गए थे। तब मुझे यह अहसास हुआ कि ओह, मैंने उनके साथ मूवी कर ली है। जैसे, 'पटाखा' के टाइम में मुझे नहीं लगा था कि मैंने विशाल सर के साथ मूवी कर ली है, तो मुझे शूट के समय ऐसा नहीं लगता, जो अच्छा भी है, क्योंकि आप नर्वस नहीं होते हैं। भगवान की कृपा रही है कि इतने दिग्गज लोगों के साथ काम करने को मिला, इतना कुछ सीखने को मिला, वह भी इतनी जल्दी, जो मुझे और ज्यादा मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। इरफान सर इतने अच्छे ऐक्टर हैं, आपको इतना कंफर्टेबल फील कराते हैं कि लगता ही नहीं कि वे इतने बड़े इंटरनैशनल स्टार हैं। आपको जितनी बार लाइंस करनी है, वे आपके साथ करेंगे। हम लोग बेशक उनकी सिचुएशन को लेकर सेंसिटिव थे कि उनके टेक पहले हो जाएं वगैरह, लेकिन वह मेरे टेक्स के लिए रुकते थे, क्यू के लिए भी खड़े होते थे, जबकि उनको जरूरत नहीं थी। इरफान और करीना को लेकर आपकी पहली मेमरी?करीना का मेरे पास पोस्टर हुआ करता था यार। मेरे लैपटॉप का वॉलपेपर करीना की फिल्म 'टशन' का पोस्टर था। मैं हमेशा से उनकी एक लॉयल फैन रही हूं। वहीं, इरफान सर की एक ऐक्टर के तौर पर बहुत रिस्पेक्ट करती थी, तो शूट करने से पहले मुझे पता था कि मैं किसके साथ काम कर रही हूं। लेकिन शूट के टाइम वह सिर्फ मेरे पापा थे, तो मैं उनके साथ जो चाहे कर सकती थीं। हां, मैं करीना को देखकर कांप ही रही थी, लेकिन वह बहुत वार्म और स्वीट थीं, तो उनके साथ काम करना बहुत अच्छा रहा। अगली फिल्म 'शिद्दत' में क्या नया लेकर आ रही हैं?उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकती, लेकिन उसमें मैं तैराक के रोल में हूं। उसके लिए मुझे स्विमिंग सीखनी पड़ी, तो ट्रेनिंग मेरी लाइफ से नहीं जाएगी। ये एक्साइटिंग भी है कि मुझे हर प्रॉजेक्ट के साथ कुछ नया सीखने को मिलता है। जैसे, 'अंग्रेजी मीडियम' की तारिका मेरे लिए सबसे मुश्किल करैक्टर रहा है। लोग मानेंगे नहीं, क्योंकि उनको लगेगा कि अरे, 17 साल की स्वीट लड़की का ही तो रोल है, लेकिन उदयपुर के एक एवरेज परिवार की इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट का वह किरदार क्रैक करना बहुत मुश्किल था। हमारे ऐक्टिंग कोच ने कहा कि तू 17 साल की दिख तो जाएगी, लेकिन अपनी आंखों से पकड़ी जाएगी तो मुझे उसके लिए इंटरनली जाना पड़ा। आप इंडस्ट्री के लिए एक आउटसाइडर थीं। इसका हिस्सा बन पाना कितना चैलेंजिंग रहा?चैलेंजिंग हर चीज होती है, आप किस तरह उसे डील करते हैं, यह महत्वपूर्ण होता है। मैं घर पर बैठी थी, जब मेरे पास काम नहीं था, लेकिन तब मैं खुद को तैयार कर रही थी। खुद को बोलती थी कि राधिका एक दिन ऐसा आएगा, जब तेरे पास सांस लेने की फुर्सत नहीं होगी, तो यह भरोसा होना चाहिए। हर रोज कुछ नया सीखना चाहिए। मैं बहुत मूवीज देखती थी, अपनी किटी में कुछ न कुछ जोड़ती रहती थी कि बस एक मौका मिल जाए। कभी-कभी एक मौके के बाद भी काम मिलने में टाइम लगता है, तब आप कैसे हैंडल करते हैं, यह जरूरी है। कुछ लोगों के लिए यह सबसे मुश्किल फेज बन जाता है।


from Entertainment News in Hindi, Latest Bollywood Movies News, मनोरंजन न्यूज़, बॉलीवुड मूवी न्यूज़ | Navbharat Times https://ift.tt/38HzGSK

Comments