इसके बाद अपराधी भले ही जमानत पर छूट जाए और बाद में नाम बदलकर दूसरा अपराध करने लगे, लेकिन जब दूसरी बार वह पकड़ा जाएगा, तो उसकी पूरी कुंडली जांच एजेंसियों के कंप्यूटर पर आ जाएगी।
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