गरीबी के बाद जेट सी उड़ी गोयल की किस्मत, फिर सबकुछ खत्म

वर्ष 1967 में गोयल दिल्ली आए तो उन्होंने कनॉट प्लेस से संचालित होने वाली एक ट्रैवल एजेंसी जॉइन कर ली जो उनके चचेरे नाना चला रहे थे। इस नौकरी से उन्हें प्रति माह करीब 300 रुपये मिलने लगे। बाद में उन्होंने खुद की एजेंसी खोली और फिर जेट एयरवेज की शुरुआत की।

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