सुरक्षा बल के सूत्रों के मुताबिक मन्नान वानी के परिजनों और दोस्तों ने कई बार उससे आतंक का रास्ता छोड़ने की अपील की, लेकिन वानी नहीं माना। वह अपनी पढ़ाई और क्षमताओं का इस्तेमाल कश्मीर के युवाओं को आतंक के रास्त पर बुलाने के लिए कर रहा था।
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